Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.18.31: यह सुनकर ब्रह्माजी ने भगवान नारायण से कहा - 'सर्वव्यापी प्रभु! कृपया उसे शक्ति प्रदान करें, आप ही यहाँ सबके आधार हैं।'   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.18.31 
ततो नारायणं देवं ब्रह्मा वचनमब्रवीत्।
विधत्स्वैषां बलं विष्णो भवानत्र परायणम्॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर ब्रह्माजी ने भगवान नारायण से कहा - 'सर्वव्यापी प्रभु! कृपया उसे शक्ति प्रदान करें, आप ही यहाँ सबके आधार हैं।'
 
On hearing this, Lord Brahma said to Lord Narayana - 'Omnipresent God! Please give him strength, you alone are the support of everyone here.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)