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mahabharat 1.18.28: उन उत्तम रसों के सम्मिश्रण से समुद्र का सारा जल दूध में बदल गया और दूध से घी बनने लगा। 28.   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.18.28 
ततस्तस्य समुद्रस्य तज्जातमुदकं पय:।
रसोत्तमैर्विमिश्रं च तत: क्षीरादभूद् घृतम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
उन उत्तम रसों के सम्मिश्रण से समुद्र का सारा जल दूध में बदल गया और दूध से घी बनने लगा। 28.
 
Due to the mixture of those excellent juices all the water of the ocean turned into milk, and ghee started forming from the milk. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)