Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.27: वृक्षों और औषधियों के अमृततुल्य रसों को पीकर तथा सुवर्णमय मंदराचल के अनेक दिव्य प्रभावकारी रत्नों से प्राप्त रस को पीकर ही देवता अमरता प्राप्त करने लगे ॥27॥ | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वृक्षों और औषधियों के अमृततुल्य रसों को पीकर तथा सुवर्णमय मंदराचल के अनेक दिव्य प्रभावकारी रत्नों से प्राप्त रस को पीकर ही देवता अमरता प्राप्त करने लगे ॥27॥
The gods started attaining immortality only by drinking the nectar-like nectar-like juices of trees and medicines and by drinking the juice obtained from the many divinely effective gems of the golden-coloured Mandrachala. 27॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥