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mahabharat 1.18.26: इसके बाद, बड़े पेड़ों से विभिन्न प्रकार के गोंद और औषधीय रस समुद्र के पानी में टपकने लगे।   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.18.26 
ततो नानाविधास्तत्र सुस्रुवु: सागराम्भसि।
महाद्रुमाणां निर्यासा बहवश्चौषधीरसा:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, बड़े पेड़ों से विभिन्न प्रकार के गोंद और औषधीय रस समुद्र के पानी में टपकने लगे।
 
Thereafter, various kinds of gums and medicinal juices from big trees began dripping into the sea water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)