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mahabharat 1.18.24: उस दावानल ने पर्वतीय हाथियों, गुफाओं से निकले हुए सिंहों तथा सहस्रों अन्य पशुओं को जलाकर भस्म कर दिया। उस पर्वत पर रहने वाले सभी विविध जीव-जन्तु मर गए॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.18.24 
ददाह कुञ्जरांस्तत्र सिंहांश्चैव विनिर्गतान्।
विगतासूनि सर्वाणि सत्त्वानि विविधानि च॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उस दावानल ने पर्वतीय हाथियों, गुफाओं से निकले हुए सिंहों तथा सहस्रों अन्य पशुओं को जलाकर भस्म कर दिया। उस पर्वत पर रहने वाले सभी विविध जीव-जन्तु मर गए॥ 24॥
 
That forest fire burned to ashes the mountain elephants, the lions that came out of the caves and thousands of other animals. All the various creatures that lived on that mountain lost their lives.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)