Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.18.23: उनके घर्षण से बार-बार अग्नि प्रकट हुई और लपटें उठने लगीं और जैसे बिजली नीले बादलों को ढक लेती है, उसी प्रकार उसने मंदार पर्वत को ढक लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.18.23 
तेषां संघर्षजश्चाग्निरर्चिर्भि: प्रज्वलन् मुहु:।
विद्युद्भिरिव नीलाभ्रमावृणोन्मन्दरं गिरिम्॥ २३॥
 
 
अनुवाद
उनके घर्षण से बार-बार अग्नि प्रकट हुई और लपटें उठने लगीं और जैसे बिजली नीले बादलों को ढक लेती है, उसी प्रकार उसने मंदार पर्वत को ढक लिया।
 
From their friction again and again fire appeared and blazed with flames and just as lightning covers the blue clouds, in the same manner it covered Mandara mountain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)