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mahabharat 1.18.21: मंदराचलन ने वरुणालय (समुद्र) और पाताल में रहने वाले नाना प्रकार के प्राणियों का संहार किया॥21॥   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.18.21 
वारुणानि च भूतानि विविधानि महीधर:।
पातालतलवासीनि विलयं समुपानयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
मंदराचलन ने वरुणालय (समुद्र) और पाताल में रहने वाले नाना प्रकार के प्राणियों का संहार किया॥21॥
 
Mandrachalan killed various types of creatures living in Varunalaya (sea) and the underworld. 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)