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mahabharat 1.18.20: उस समय सैकड़ों जलचर जीव उस महान पर्वत से कुचलकर खारे पानी के उस सागर में विलीन हो गये।   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.18.20 
तत्र नाना जलचरा विनिष्पिष्टा महाद्रिणा।
विलयं समुपाजग्मु: शतशो लवणाम्भसि॥ २०॥
 
 
अनुवाद
उस समय सैकड़ों जलचर जीव उस महान पर्वत से कुचलकर खारे पानी के उस सागर में विलीन हो गये।
 
At that time hundreds of aquatic creatures were crushed by that great mountain and merged into that ocean of salty water.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)