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mahabharat 1.18.19: जब देवता और दानव मंदार पर्वत पर समुद्र मंथन कर रहे थे, तो विशाल बादलों की गर्जना जैसी तीव्र ध्वनि हुई।   |   mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान‍्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.18.19 
बभूवात्र महानादो महामेघरवोपम:।
उदधेर्मथ्यमानस्य मन्दरेण सुरासुरै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब देवता और दानव मंदार पर्वत पर समुद्र मंथन कर रहे थे, तो विशाल बादलों की गर्जना जैसी तीव्र ध्वनि हुई।
 
When the gods and demons were churning the ocean on Mount Mandara, there came a loud sound, like the roar of huge clouds.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)