Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.18.17: वे धुएँ और बिजली से चमकते हुए बादलों का रूप धारण करके, कठिन परिश्रम और पीड़ा से पीड़ित देवताओं पर जल की धाराएँ बरसाते रहे॥17॥ | mahabharat अध्याय 1.18: देवताओं और दैत्योंद्वारा अमृतके लिये समुद्रका मन्थन, अनेक रत्नोंके साथ अमृतकी उत्पत्ति और भगवान्का मोहिनीरूप धारण करके दैत्योंके हाथसे अमृत ले लेना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ते धूमसङ्घा: सम्भूता मेघसङ्घा: सविद्युत:।
अभ्यवर्षन् सुरगणान् श्रमसंतापकर्शितान्॥ १७॥
अनुवाद
वे धुएँ और बिजली से चमकते हुए बादलों का रूप धारण करके, कठिन परिश्रम और पीड़ा से पीड़ित देवताओं पर जल की धाराएँ बरसाते रहे॥17॥
Forming themselves into clouds accompanied by smoke and lightning, they kept showering torrents of water on the gods, who were suffering from hard work and agony. ॥17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥