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mahabharat 1.178.9: तत्पश्चात् वे क्षत्रिय अपने खोए हुए नेत्रों को पुनः प्राप्त करके लौट आए; इधर भृगुवंशी और ऋषि ने सम्पूर्ण जगत् की पराजय का विचार किया॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.178.9 
चक्षूंषि प्रतिलब्ध्वा च प्रतिजग्मुस्ततो नृपा:।
भार्गवस्तु मुनिर्मेने सर्वलोकपराभवम्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् वे क्षत्रिय अपने खोए हुए नेत्रों को पुनः प्राप्त करके लौट आए; इधर भृगुवंशी और ऋषि ने सम्पूर्ण जगत् की पराजय का विचार किया॥9॥
 
Thereafter, having recovered their lost eyes, those Kshatriyas returned; Here Bhriguvanshi and the sage thought of the defeat of the entire world. 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)