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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.178.8 
अनेनैव च विख्यातो नाम्ना लोकेषु सत्तम:।
स और्व इति विप्रर्षिरूरुं भित्त्वा व्यजायत॥ ८॥
 
 
अनुवाद
वह महान ब्रह्मर्षि अपनी माता की जंघा को छेदकर उत्पन्न हुआ था, इसलिए वह संसार में 'और्व' नाम से विख्यात हुआ।
 
That great Brahmarshi was born by piercing the thigh of his mother, and hence he came to be known in the world by the name 'Aurva'. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)