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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 178: पितरोंद्वारा और्वके क्रोधका निवारण  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.178.3 
गर्भानपि यदा यूयं भृगूणां घ्नत पुत्रका:।
तदायमूरुणा गर्भो मया वर्षशतं धृत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे बच्चों! जब से तुम सबने भृगुवंश के गर्भस्थ बालकों को मारना आरम्भ किया है, तब से मैंने अपने इस भ्रूण को सौ वर्षों तक अपनी एक जाँघ में छिपाकर रखा था।
 
Children! Since the time you all started killing the unborn children of the Bhrigu dynasty, I had kept this foetus of mine hidden in one of my thighs for a hundred years.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)