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mahabharat 1.177.8: 'अनघ! जिसे तू अपना पिता मानता है, वह तेरा पिता नहीं है। वह तो तेरे महाप्रतापी पिता का भी पूज्य पिता है।'॥8॥   |   mahabharat अध्याय 1.177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.177.8 
मन्यसे यं तु तातेति नैष तातस्तवानघ।
आर्य एष पिता तस्य पितुस्तव यशस्विन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'अनघ! जिसे तू अपना पिता मानता है, वह तेरा पिता नहीं है। वह तो तेरे महाप्रतापी पिता का भी पूज्य पिता है।'॥8॥
 
'Anagh! The person whom you consider as your father is not your father. He is the venerable father of even your illustrious father.'॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)