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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना
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श्लोक 7
श्लोक
1.177.7
मा तात तात तातेति ब्रूह्येनं पितरं पितु:।
रक्षसा भक्षितस्तात तव तातो वनान्तरे॥ ७॥
अनुवाद
'बेटा! ये तुम्हारे पिता के भी पिता हैं। इन्हें 'पिताजी, पिताजी' मत कहो। बेटा! तुम्हारे पिता को जंगल में एक राक्षस ने खा लिया था।'
‘Son! He is your father's father as well. Do not call him 'father, father'. Son! Your father was eaten by a demon in the forest.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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