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mahabharat 1.177.5: परंतप कुन्तीकुमार! एक दिन ब्रह्मर्षि पराशर ने वशिष्ठजी को उनकी माता विश्वंती के सामने 'तत्' कहकर संबोधित किया। 5॥   |   mahabharat अध्याय 1.177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.177.5 
स तात इति विप्रर्षिर्वसिष्ठं प्रत्यभाषत।
मातु: समक्षं कौन्तेय अदृश्यन्त्या: परंतप॥ ५॥
 
 
अनुवाद
परंतप कुन्तीकुमार! एक दिन ब्रह्मर्षि पराशर ने वशिष्ठजी को उनकी माता विश्वंती के सामने 'तत्' कहकर संबोधित किया। 5॥
 
Parantap Kuntikumar! One day, Brahmarishi Parashar addressed Vashishthaji as 'Tat' in front of his mother Vishwaanti. 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)