श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.177.4 
अमन्यत स धर्मात्मा वसिष्ठं पितरं मुनि:।
जन्मप्रभृति तस्मिंस्तु पितरीवान्ववर्तत॥ ४॥
 
 
अनुवाद
पुण्यात्मा ऋषि पराशर ऋषि वसिष्ठ को अपना पिता मानते थे और जन्म से ही उनके प्रति पितृतुल्य भाव रखते थे ॥4॥
 
The virtuous sage Parashara regarded sage Vasishtha as his father and had a paternal feeling for him right from his birth. ॥4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)