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mahabharat 1.177.29: 'शोभने! आप अपने पुत्र सहित हम सब पर प्रसन्न हों और हमें नवीन दृष्टि प्रदान करके हम सब राजकुमारों की रक्षा करें।'॥29॥   |   mahabharat अध्याय 1.177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.177.29 
सपुत्रा त्वं प्रसादं न: कर्तुमर्हसि शोभने।
पुनर्दृष्टिप्रदानेन राज्ञ: संत्रातुमर्हसि॥ २९॥
 
 
अनुवाद
'शोभने! आप अपने पुत्र सहित हम सब पर प्रसन्न हों और हमें नवीन दृष्टि प्रदान करके हम सब राजकुमारों की रक्षा करें।'॥29॥
 
'Shobhane! You along with your son, please be pleased with us all and protect all of us princes by giving us fresh sight.'॥ 29॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वण्यौर्वोपाख्याने सप्तसप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७७॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें और्वोपाख्यानविषयक एक सौ सतहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७७॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)