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mahabharat 1.177.26: तब मोहवश दृष्टि खो चुके क्षत्रियों ने पुनः दृष्टि पाने के लिए उसी पतिव्रता और गुणवती ब्राह्मणी की शरण ली॥26॥   |   mahabharat अध्याय 1.177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.177.26 
ततस्ते मोहमापन्ना राजानो नष्टदृष्टय:।
ब्राह्मणीं शरणं जग्मुर्दृष्टॺर्थं तामनिन्दिताम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तब मोहवश दृष्टि खो चुके क्षत्रियों ने पुनः दृष्टि पाने के लिए उसी पतिव्रता और गुणवती ब्राह्मणी की शरण ली॥26॥
 
Then the Kshatriyas who had lost their sight due to infatuation, took refuge in the same chaste and virtuous Brahmini to regain their sight.॥26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)