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mahabharat 1.177.24: उसने देखा कि वह ब्राह्मणी अपने तेज से चमक रही है। उसी समय उसके गर्भ में स्थित बालक उसकी जंघा फाड़कर बाहर आ गया॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 1.177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.177.24 
ददृशुर्ब्राह्मणीं तेऽथ दीप्यमानां स्वतेजसा।
अथ गर्भ: स भित्त्वोरुं ब्राह्मण्या निर्जगाम ह॥ २४॥
 
 
अनुवाद
उसने देखा कि वह ब्राह्मणी अपने तेज से चमक रही है। उसी समय उसके गर्भ में स्थित बालक उसकी जंघा फाड़कर बाहर आ गया॥ 24॥
 
He saw that the Brahmin lady was shining with her own radiance. At that very moment, the child in her womb came out by tearing her thigh.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)