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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना
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श्लोक 2
श्लोक
1.177.2
जातकर्मादिकास्तस्य क्रिया: स मुनिसत्तम:।
पौत्रस्य भरतश्रेष्ठ चकार भगवान् स्वयम्॥ २॥
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! भगवान वशिष्ठ ऋषि ने स्वयं अपने पौत्र का जातकर्म आदि संस्कार किया था॥2॥
Bharatshrestha! Sage Lord Vashishtha himself performed the caste rituals etc. of his grandson. 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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