श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 177: शक्तिपुत्र पराशरका जन्म और पिताकी मृत्युका हाल सुनकर कुपित हुए पराशरको शान्त करनेके लिये वसिष्ठजीका उन्हें और्वोपाख्यान सुनाना  »  श्लोक 10-11h
 
 
श्लोक  1.177.10-11h 
तं तथा निश्चितात्मानं स महात्मा महातपा:।
ऋषिर्ब्रह्मविदां श्रेष्ठो मैत्रावरुणिरन्त्यधी:॥ १०॥
वसिष्ठो वारयामास हेतुना येन तच्छृणु।
 
 
अनुवाद
उनके मन में ऐसा निश्चय जानकर महातपस्वी, महात्मा और ब्रह्मविद्वानों में श्रेष्ठ मित्रवरुनंदन वशिष्ठजी ने पराशर को ऐसा करने से रोक दिया। जिस कारण और युक्ति से वे उन्हें रोकने में सफल हुए, उसे सुनो। 10 1/2॥
 
Knowing such determination in his mind, the great ascetic, Mahatma and the best among the Brahma scholars, Mitravarunandan Vashishthaji, stopped Parashar from doing this. Listen to the reason and strategy by which they were successful in stopping them. 10 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)