श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.176.8 
दृष्ट्वा स पुनरेवर्षिर्नदीं हैमवतीं तदा।
चण्डग्राहवतीं भीमां तस्या: स्रोतस्यपातयत्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
(इस प्रकार विचरण करते हुए) महर्षि ने पुनः हिमालय से निकलती हुई एक भयंकर नदी देखी, जिसमें बड़े भयंकर मगरमच्छ रहते थे। वे पुनः उसके प्रबल प्रवाह में कूद पड़े॥8॥
 
(While wandering like this) the Maharshi again saw a fierce river originating from the Himalayas, in which very ferocious crocodiles lived. He again threw himself into its strong current.॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)