Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.176.5: हे शत्रु सेना का नाश करने वाले अर्जुन! उस नदी ने वसिष्ठ के बंधनों को काटकर उन्हें भूमि पर लाकर बंधन से मुक्त कर दिया॥5॥ | mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ छित्त्वा नदी पाशांस्तस्यारिबलसूदन।
स्थलस्थं तमृषिं कृत्वा विपाशं समवासृजत्॥ ५॥
अनुवाद
हे शत्रु सेना का नाश करने वाले अर्जुन! उस नदी ने वसिष्ठ के बंधनों को काटकर उन्हें भूमि पर लाकर बंधन से मुक्त कर दिया॥5॥
O Arjuna, destroyer of the enemy's army! That river cut off Vasishtha's bonds and brought him to land and released him after freeing him from bondage. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥