Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.176.47: तदनन्तर बारहवें वर्ष में एक बालक उत्पन्न हुआ, वही महापुरुष राजर्षि अश्मक के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जिसने पौदन्य नामक नगर बसाया ॥47॥ | mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ततोऽपि द्वादशे वर्षे स जज्ञे पुरुषर्षभ:।
अश्मको नाम राजर्षि: पौदन्यं यो न्यवेशयत्॥ ४७॥
अनुवाद
तदनन्तर बारहवें वर्ष में एक बालक उत्पन्न हुआ, वही महापुरुष राजर्षि अश्मक के नाम से प्रसिद्ध हुआ, जिसने पौदन्य नामक नगर बसाया ॥47॥
Subsequently, in the twelfth year a child was born. The same great man became famous by the name of Rajarshi Ashmaka, who established a city named Paudanya. 47॥
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि चैत्ररथपर्वणि वासिष्ठे सौदाससुतोत्पत्तौ षट्सप्तत्यधिकशततमोऽध्याय:॥ १७६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत चैत्ररथपर्वमें वसिष्ठचरित्रके प्रसंगमें सौदासको पुत्रप्राप्तिविषयक एक सौ छिहत्तरवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १७६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥