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mahabharat 1.176.46: जब बहुत समय बीतने पर भी गर्भ बाहर नहीं आया, तब प्रतापी रानी (मदयन्ती) ने अपने गर्भ पर भस्म (पत्थर) से प्रहार किया।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.176.46 
दीर्घकालेन सा गर्भं सुषुवे न तु तं यदा।
तदा देव्यश्मना कुक्षिं निर्बिभेद यशस्विनी॥ ४६॥
 
 
अनुवाद
जब बहुत समय बीतने पर भी गर्भ बाहर नहीं आया, तब प्रतापी रानी (मदयन्ती) ने अपने गर्भ पर भस्म (पत्थर) से प्रहार किया।
 
When even after a long time the fetus did not come out, then the glorious queen (Madayanti) struck her womb with an ashma (stone).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)