श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  1.176.44 
ऋतावथ महर्षि: स सम्बभूव तया सह।
देव्या दिव्येन विधिना वसिष्ठ: श्रेष्ठभागृषि:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् भगवान् के भक्त महर्षि वशिष्ठ ने ऋतुकाल में शास्त्रविधि से विधिपूर्वक रानी के साथ नियोग किया॥44॥
 
After that, Maharishi Vashishtha, a devotee of God, performed Niyoga with the queen according to the supernatural method of the scriptures during the season. 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)