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mahabharat 1.176.42: कुरुनन्दन! जिस प्रकार अमरावती इन्द्रदेव से सुशोभित है, उसी प्रकार संतुष्ट और स्वस्थ मनुष्यों से परिपूर्ण अयोध्यापुरी उस समय महाराज कल्माषपाद के आगमन से अत्यंत सुशोभित हो रही थी॥42॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  1.176.42 
तुष्टपुष्टजनाकीर्णा सा पुरी कुरुनन्दन।
अशोभत तदा तेन शक्रेणेवामरावती॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! जिस प्रकार अमरावती इन्द्रदेव से सुशोभित है, उसी प्रकार संतुष्ट और स्वस्थ मनुष्यों से परिपूर्ण अयोध्यापुरी उस समय महाराज कल्माषपाद के आगमन से अत्यंत सुशोभित हो रही थी॥42॥
 
Kurunandan! Just as Amravati is adorned by Lord Indra, in the same way Ayodhyapuri, filled with contented and healthy people, was at that time greatly adorned by the presence of Maharaj Kalmashapada. 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)