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mahabharat 1.176.37: अपने पापरहित महान राजा के आगमन की खबर सुनकर अयोध्या के सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए और उनका स्वागत करने के लिए बाहर निकले, जैसे देवता अपने स्वामी इंद्र का स्वागत करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.176.37 
तं प्रजा: प्रतिमोदन्त्य: सर्वा: प्रत्युद्‍गतास्तदा।
विपाप्मानं महात्मानं दिवौकस इवेश्वरम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
अपने पापरहित महान राजा के आगमन की खबर सुनकर अयोध्या के सभी लोग बहुत प्रसन्न हुए और उनका स्वागत करने के लिए बाहर निकले, जैसे देवता अपने स्वामी इंद्र का स्वागत करते हैं।
 
Hearing of the arrival of their sinless great king, all the people of Ayodhya became very happy and came out to welcome him just as the gods welcome their lord Indra. 37.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)