श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.176.30 
सौदासोऽहं महाभाग याज्यस्ते मुनिसत्तम।
अस्मिन् काले यदिष्टं ते ब्रूहि किं करवाणि ते॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
'महान् ॐ! मैं आपका यजमान सौदास हूँ। इस समय आपकी जो इच्छा हो, वह बताइए - मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ?'॥30॥
 
'Great sage! I am your host Saudasa. Whatever you wish at this time, tell me - what service can I render to you?'॥ 30॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)