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mahabharat 1.176.25: गन्धर्व कहते हैं- हे भारत! उस राक्षस को आते देख तेजस्वी भगवान वशिष्ठ मुनि ने गर्जना मात्र से उसे रोक दिया॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.176.25 
गन्धर्व उवाच
तमापतन्तं सम्प्रेक्ष्य वसिष्ठो भगवानृषि:।
वारयामास तेजस्वी हुंकारेणैव भारत॥ २५॥
 
 
अनुवाद
गन्धर्व कहते हैं- हे भारत! उस राक्षस को आते देख तेजस्वी भगवान वशिष्ठ मुनि ने गर्जना मात्र से उसे रोक दिया॥25॥
 
Gandharva says- India! Seeing that demon coming, the brilliant Lord Vashishtha Muni stopped him with just a roar. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)