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mahabharat 1.176.18: भरत! भयंकर राक्षस से पीड़ित राजा कल्माषपाद ने मुनि को देखकर अत्यन्त क्रोधित होकर उन्हें तुरंत ही खा जाने की इच्छा की॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.176.18 
स तु दृष्ट्वैव तं राजा क्रुद्ध उत्थाय भारत।
आविष्टो रक्षसोग्रेण इयेषात्तुं तदा मुनिम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
भरत! भयंकर राक्षस से पीड़ित राजा कल्माषपाद ने मुनि को देखकर अत्यन्त क्रोधित होकर उन्हें तुरंत ही खा जाने की इच्छा की॥18॥
 
Bharata! King Kalmashpada, who was possessed by a terrible demon, became very angry when he saw the sage and immediately wanted to devour him.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)