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mahabharat 1.176.15: विश्वान्ति ने कहा - प्रभु ! यह मेरे गर्भ से उत्पन्न आपके पुत्र शक्ति का बालक है । मुने ! इसे मेरे गर्भ में वेदों का अभ्यास करते हुए बारह वर्ष हो चुके हैं ॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 176: कल्माषपादका शापसे उद्धार और वसिष्ठजीके द्वारा उन्हें अश्मक नामक पुत्रकी प्राप्ति  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.176.15 
अदृश्यन्त्युवाच
अयं कुक्षौ समुत्पन्न: शक्तेर्गर्भ: सुतस्य ते।
समा द्वादश तस्येह वेदानभ्यस्यतो मुने॥ १५॥
 
 
अनुवाद
विश्वान्ति ने कहा - प्रभु ! यह मेरे गर्भ से उत्पन्न आपके पुत्र शक्ति का बालक है । मुने ! इसे मेरे गर्भ में वेदों का अभ्यास करते हुए बारह वर्ष हो चुके हैं ॥15॥
 
Vishwaanti said – Lord! This is the child of your son Shakti born in my womb. Mune! It has been twelve years since he practiced the Vedas in my womb. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)