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mahabharat 1.175.43: जब वशिष्ठ जी ने सुना कि विश्वामित्र ने उनके पुत्रों को मार डाला है, तो उन्होंने अपने दुःख को उसी प्रकार नियंत्रित कर लिया, जिस प्रकार महान पर्वत सुमेरु ने पृथ्वी को नियंत्रित कर लिया था।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  1.175.43 
वसिष्ठो घातिताञ्छ्रुत्वा विश्वामित्रेण तान् सुतान्।
धारयामास तं शोकं महाद्रिरिव मेदिनीम्॥ ४३॥
 
 
अनुवाद
जब वशिष्ठ जी ने सुना कि विश्वामित्र ने उनके पुत्रों को मार डाला है, तो उन्होंने अपने दुःख को उसी प्रकार नियंत्रित कर लिया, जिस प्रकार महान पर्वत सुमेरु ने पृथ्वी को नियंत्रित कर लिया था।
 
Vasishtha, on hearing that Viswamitra had killed his sons, contained the force of his grief in the same way as the great mountain Sumeru contained the earth.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)