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mahabharat 1.175.40: ऐसा कहकर राजा ने तुरन्त ही शक्ति के प्राण ले लिए और उसे उसी प्रकार खा गया, जैसे बाघ अपने स्वादानुसार किसी प्राणी को चबाता है।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.175.40 
एवमुक्त्वा तत: सद्यस्तं प्राणैर्विप्रयुज्य च।
शक्तिनं भक्षयामास व्याघ्र: पशुमिवेप्सितम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर राजा ने तुरन्त ही शक्ति के प्राण ले लिए और उसे उसी प्रकार खा गया, जैसे बाघ अपने स्वादानुसार किसी प्राणी को चबाता है।
 
Having said this the king instantly took Shakti's life and devoured her just as a tiger chews up an animal according to its taste.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)