Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.175.4-5: महाबली विश्वामित्र उन्हें अपना यजमान बनाना चाहते थे। राजा कल्माषपाद युद्ध में कभी पराजित नहीं होते थे। उस दिन वे भूख-प्यास से पीड़ित होकर एक संकरे मार्ग पर पहुँचे थे जहाँ से केवल एक ही व्यक्ति जा सकता था। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि सामने से महामुनि वसिष्ठकुमार आ रहे हैं॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अकामयत् तं याज्यार्थे विश्वामित्र: प्रतापवान्।
स तु राजा महात्मानं वासिष्ठमृषिसत्तमम्॥ ४॥
तृषार्तश्च क्षुधार्तश्च एकायनगत: पथि।
अपश्यदजित: संख्ये मुनिं प्रतिमुखागतम्॥ ५॥
अनुवाद
महाबली विश्वामित्र उन्हें अपना यजमान बनाना चाहते थे। राजा कल्माषपाद युद्ध में कभी पराजित नहीं होते थे। उस दिन वे भूख-प्यास से पीड़ित होकर एक संकरे मार्ग पर पहुँचे थे जहाँ से केवल एक ही व्यक्ति जा सकता था। वहाँ पहुँचकर उन्होंने देखा कि सामने से महामुनि वसिष्ठकुमार आ रहे हैं॥4-5॥
The mighty Vishwamitra wanted to make him his host. King Kalmashpad was never defeated in war. That day he was suffering from hunger and thirst and had reached a narrow path where only one person could pass. On reaching there he saw that the great sage Vasishthakumar was coming from the front.॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥