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mahabharat 1.175.39: ‘चूँकि तुमने मुझे यह सर्वथा अनुचित शाप दिया है, अतः अब मैं तुम्हारे द्वारा उत्पन्न मनुष्यों को खाऊँगा।’ ॥39॥   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.175.39 
यस्मादसदृश: शाप: प्रयुक्तोऽयं मयि त्वया।
तस्मात् त्वत्त: प्रवर्तिष्ये खादितुं पुरुषानहम्॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
‘चूँकि तुमने मुझे यह सर्वथा अनुचित शाप दिया है, अतः अब मैं तुम्हारे द्वारा उत्पन्न मनुष्यों को खाऊँगा।’ ॥39॥
 
'Since you have given me this totally undeserved curse, I will now start eating human beings from you.' ॥ 39॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)