Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.175.37: राजा के ऐसा दो बार कहने से उस पर शाप और भी प्रबल हो गया। साथ ही राक्षस की शक्ति भी उसमें सम्मिलित हो गई और राजा की विवेक शक्ति सर्वथा नष्ट हो गई ॥37॥ | mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
द्विरनुव्याहृते राज्ञ: स शापो बलवानभूत्।
रक्षोबलसमाविष्टो विसंज्ञश्चाभवन्नृप:॥ ३७॥
अनुवाद
राजा के ऐसा दो बार कहने से उस पर शाप और भी प्रबल हो गया। साथ ही राक्षस की शक्ति भी उसमें सम्मिलित हो गई और राजा की विवेक शक्ति सर्वथा नष्ट हो गई ॥37॥
The curse on the king became stronger because he said this twice. Along with that, the power of the demon got added to him and the king's discretion power got completely lost. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥