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mahabharat 1.175.35: ब्राह्मण बोला, "वह दुष्ट राजा मुझे अभक्ष्य भोजन दे रहा है; इसलिए उस मूर्ख की जीभ सदैव ऐसे भोजन के लिए लालायित रहेगी।"   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.175.35 
ब्राह्मण उवाच
यस्मादभोज्यमन्नं मे ददाति स नृपाधम:।
तस्मात् तस्यैव मूढस्य भविष्यत्यत्र लोलुपा॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण बोला, "वह दुष्ट राजा मुझे अभक्ष्य भोजन दे रहा है; इसलिए उस मूर्ख की जीभ सदैव ऐसे भोजन के लिए लालायित रहेगी।"
 
The Brahmin said, "That wicked king is giving me food that is inedible; hence the tongue of that fool will always crave for such food." 35.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)