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mahabharat 1.175.31: राजा राक्षस से क्रोधित हो गया, इसलिए उसने विश्वासपूर्वक रसोइये से कहा, 'ब्राह्मण को मानव मांस खिलाओ', और उसने यह बात बार-बार दोहराई।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.175.31 
राजा तु रक्षसाऽऽविष्ट: सूदमाह गतव्यथ:।
अप्येनं नरमांसेन भोजयेति पुन: पुन:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
राजा राक्षस से क्रोधित हो गया, इसलिए उसने विश्वासपूर्वक रसोइये से कहा, 'ब्राह्मण को मानव मांस खिलाओ', और उसने यह बात बार-बार दोहराई।
 
The king was enraged by the demon, so he confidently told the cook, 'Feed the brahmin human flesh', and he repeated this again and again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)