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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.175.23 
तत: स नृपतिस्तेन रक्षसान्तर्गतेन वै।
बलवत् पीडित: पार्थ नान्वबुध्यत किंचन॥ २३॥
 
 
अनुवाद
हे कुन्तीपुत्र! राजा अपने अन्दर प्रविष्ट राक्षस के कारण अत्यन्त व्याकुल हो रहे थे और कुछ भी सोच पाने में असमर्थ थे।
 
O son of Kunti! The king was extremely tormented by the demon that had entered inside him and was unable to think about anything. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)