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mahabharat 1.175.19: जब शक्ति ने उन्हें शाप दिया, तो महान राजा कल्माषपाद उनकी स्तुति करते हुए उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनकी शरण में गए।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.175.19 
स तु शप्तस्तदा तेन शक्तिना वै नृपोत्तम:।
जगाम शरणं शक्तिं प्रसादयितुमर्हयन्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
जब शक्ति ने उन्हें शाप दिया, तो महान राजा कल्माषपाद उनकी स्तुति करते हुए उन्हें प्रसन्न करने के लिए उनकी शरण में गए।
 
When Shakti cursed him, the great king Kalmashpada went to seek refuge in her to please her, praising her.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)