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mahabharat 1.175.17: तत्पश्चात् मनुष्यों में श्रेष्ठ कल्माषपाद ने वसिष्ठ ऋषि के पुत्र उन महामुनि शक्ति को पहचान लिया, जो वसिष्ठ के समान तेजस्वी थे ॥17॥   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.175.17 
तत: स बुबुधे पश्चात् तमृषिं नृपसत्तम:।
ऋषे: पुत्रं वसिष्ठस्य वसिष्ठमिव तेजसा॥ १७॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् मनुष्यों में श्रेष्ठ कल्माषपाद ने वसिष्ठ ऋषि के पुत्र उन महामुनि शक्ति को पहचान लिया, जो वसिष्ठ के समान तेजस्वी थे ॥17॥
 
Thereafter, Kalmashapada, the best among mortals, recognized that great sage Shakti, the son of sage Vasishtha, who was as bright as Vasishtha. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)