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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.175.16 
तयोर्विवदतोरेवं समीपमुपचक्रमे।
ऋषिरुग्रतपा: पार्थ विश्वामित्र: प्रतापवान्॥ १६॥
 
 
अनुवाद
हे अर्जुन! जब राजा और ऋषिपुत्र इस प्रकार विवाद कर रहे थे, तब महाबली विश्वामित्र, जो घोर तपस्वी थे, उनके पास आये।
 
Arjun! When the King and the sage's son were arguing in this manner, the mighty sage Visvamitra, who was a fierce ascetic, went near them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)