vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक
»
श्लोक 16
श्लोक
1.175.16
तयोर्विवदतोरेवं समीपमुपचक्रमे।
ऋषिरुग्रतपा: पार्थ विश्वामित्र: प्रतापवान्॥ १६॥
अनुवाद
हे अर्जुन! जब राजा और ऋषिपुत्र इस प्रकार विवाद कर रहे थे, तब महाबली विश्वामित्र, जो घोर तपस्वी थे, उनके पास आये।
Arjun! When the King and the sage's son were arguing in this manner, the mighty sage Visvamitra, who was a fierce ascetic, went near them.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×