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mahabharat 1.175.15: उन दिनों विश्वामित्र और वशिष्ठ में यजमान के लिए वैमनस्य चल रहा था। उस समय विश्वामित्र राजा कल्माषपाद के पास आये।   |   mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.175.15 
ततो याज्यनिमित्ते तु विश्वामित्रवसिष्ठयो:।
वैरमासीत् तदा तं तु विश्वामित्रोऽन्वपद्यत॥ १५॥
 
 
अनुवाद
उन दिनों विश्वामित्र और वशिष्ठ में यजमान के लिए वैमनस्य चल रहा था। उस समय विश्वामित्र राजा कल्माषपाद के पास आये।
 
In those days there was enmity between Vishwamitra and Vasishtha for the host. At that time Vishwamitra came to King Kalmashpad.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)