Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.175.13-14: तप की प्रबल शक्ति से संपन्न शक्ति मुनि बोले - 'कल्माषपाद राजाओं में अधम है ! तू राक्षस के समान तपस्वी ब्राह्मण का वध कर रहा है, अतः आज से तू नरभक्षी राक्षस हो जाएगा और अब से इस पृथ्वी पर मनुष्य-मांस का मोह करके विचरण करेगा । नृपधाम ! यहाँ से चले जा ॥' ॥13-14॥ | mahabharat अध्याय 1.175: शक्तिके शापसे कल्माषपादका राक्षस होना, विश्वामित्रकी प्रेरणासे राक्षसद्वारा वसिष्ठके पुत्रोंका भक्षण और वसिष्ठका शोक । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तप की प्रबल शक्ति से संपन्न शक्ति मुनि बोले - 'कल्माषपाद राजाओं में अधम है ! तू राक्षस के समान तपस्वी ब्राह्मण का वध कर रहा है, अतः आज से तू नरभक्षी राक्षस हो जाएगा और अब से इस पृथ्वी पर मनुष्य-मांस का मोह करके विचरण करेगा । नृपधाम ! यहाँ से चले जा ॥' ॥13-14॥
Shakti Muni, endowed with the powerful power of penance, said – 'Kalmashapada is the wretched among the kings! You are killing an ascetic Brahmin like a demon, hence from today onwards you will become a cannibalistic demon and from now on you will roam on this earth addicted to human flesh. Nripadham! Get out from here'. 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥