श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक d2-d9
 
 
श्लोक  1.174.d2-d9 
(विश्वामित्रस्ततो दृष्ट्वा क्रोधाविष्ट: स रोदसी।
ववर्ष शरवर्षाणि वसिष्ठे मुनिसत्तमे॥
घोररूपांश्च नाराचान् क्षुरान् भल्लान् महामुनि:।
विश्वामित्रप्रयुक्तांस्तान् वैणवेन व्यमोचयत्॥
वसिष्ठस्य तदा दृष्ट्वा कर्मकौशलमाहवे॥
विश्वामित्रोऽपि कोपेन भूय: शत्रुनिपातन:।
दिव्यास्त्रवर्षं तस्मै तु प्राहिणोन्मुनये रुषा॥
आग्नेयं वारुणं चैन्द्रं याम्यं वायव्यमेव च।
विससर्ज महाभागे वसिष्ठे ब्रह्मण: सुते॥
अस्त्राणि सर्वतो ज्वालां विसृजन्ति प्रपेदिरे।
युगान्तसमये घोरा: पतङ्गस्येव रश्मय:॥
वसिष्ठोऽपि महातेजा ब्रह्मशक्तिप्रयुक्तया।
यष्टॺा निवारयामास सर्वाण्यस्त्राणि स स्मयन्॥
ततस्ते भस्मसाद्‍भूता: पतन्ति स्म महीतले।
अपोह्य दिव्यान्यस्त्राणि वसिष्ठो वाक्यमब्रवीत्॥
 
 
अनुवाद
यह देखकर विश्वामित्र क्रोध से भर गये और महर्षि वशिष्ठ को लक्ष्य करके पृथ्वी तथा आकाश पर बाणों की वर्षा करने लगे; किन्तु महर्षि वशिष्ठ ने विश्वामित्र द्वारा चलाये गये नाराच, क्षुर तथा भल्ल नामक भयंकर बाणों को एक बाँस के डण्डे से ही दूर कर दिया। युद्ध में वशिष्ठ मुनिका का कौशल देखकर शत्रुओं का संहार करने वाले विश्वामित्र पुनः क्रोधित हो उठे और महर्षि वशिष्ठ पर दिव्यास्त्रों की वर्षा करने लगे। उन्होंने ब्रह्माजी के पुत्र महाभाग वशिष्ठ पर आग्नेयास्त्र, वरुणास्त्र, ऐन्द्रास्त्र, यम्यास्त्र तथा वायव्यास्त्र का प्रयोग किया। वे सभी अस्त्र प्रलयकाल के सूर्य की प्रचण्ड किरणों के समान सब ओर से ज्वालाएँ छोड़ते हुए महर्षि पर गिर पड़े; किन्तु महाबली वशिष्ठ ने मुस्कुराकर ब्रह्मा की शक्ति से प्रेरित एक डण्डे के द्वारा उन सभी अस्त्रों को वापस भेज दिया। तब वे सभी अस्त्र भस्म होकर पृथ्वी पर गिर पड़े। इस प्रकार उन दिव्यास्त्रों को दूर करके वशिष्ठ ने यह बात विश्वामित्र को बताई।
 
Seeing this, Vishwamitra was filled with anger and started raining arrows on the earth and the sky, aiming at the great sage Vashishtha; But the great sage Vashishtha removed the fierce arrows named Narach, Kshur and Bhalla fired by Vishwamitra with just a bamboo stick. Seeing the skill of Vasishtha Munika in the war, Vishwamitra, who killed the enemies, again got angry and started showering divine weapons on Maharishi Vasishtha. He used firearms, Varunastra, Aindrastra, Yamyastra and Vayavyastra on Brahmaji's son Mahabhaga Vashishtha. All those weapons fell on Maharshi like the fierce rays of the sun of the doomsday, releasing flames from all sides; But the mighty Vasishtha smiled and sent all these weapons back with the help of a stick inspired by the power of Brahma. Then all those weapons turned into ashes and fell on the earth. In this way, after dispelling those divine weapons, Vasishtha told this to Vishwamitra.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)