श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.174.38 
चिबुकांश्च पुलिन्दांश्च चीनान् हूणान् सकेरलान्।
ससर्ज फेनत: सा गौर्म्लेच्छान् बहुविधानपि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार उस गौ के झाग से उन्होंने चिन्बुक, पुलिन्द, चीन, हूण, केरल आदि अनेक प्रकार के म्लेच्छों की रचना की ॥38॥
 
In the same way, from that cow's foam he created many kinds of mlechha (mlechha) like Chinbuk, Pulinda, China, Hun, Kerala etc. ॥38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)