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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 174: वसिष्ठजीके अद्‍भुत क्षमा-बलके आगे विश्वामित्रजीका पराभव  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.174.37 
मूत्रतश्चासृजत् कांश्चिच्छबरांश्चैव पार्श्वत:।
पौण्ड्रान् किरातान् यवनान् सिंहलान् बर्बरान् खसान्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
उसके मूत्र से अनेक शबर उत्पन्न हुए। उसके वंश से पौंड्र, किरात, यवन, सिंहल, बर्बर और खस उत्पन्न हुए।
 
Many Shabars were born from his urine. From his side, Paundras, Kiratas, Yavanas, Sinhalas, Barbars and Khasas were created.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)